Shayari
जो आपने न लिया हो, ऐसा कोई इम्तहान न रहा, इंसान आखिर मोहब्बत में इंसान न रहा, है कोई बस्ती, जहा से न उठा हो ज़नाज़ा दीवाने का, आशिक की कुर्बत से महरूम कोई कब्रस्तान न रहा, हाँ वो मोहब्बत ही है जो फैली हे ज़र्रे ज़र्रे में, न हिन्दू बेदाग रहा, बाकी मुस्लमान न रहा, जिसने भी कोशिश की इस महक को नापाक करने की, इसी दुनिया में उसका कही नामो-निशान न रहा, जिसे मिल गयी मोहब्बत वो बादशाह बन गया, कुछ और पाने का उसके दिल को अरमान न रहा,
Category: Inspirational Shayaries        Posted On: 02-Jul-2010